बांसी क्षेत्र के उसकी शुक्ल स्थित बाग में चल रहे श्री सीताराम शिवार्चन ज्ञान महायज्ञ एवं श्रीराम कथा

हमेशा अपडेट रहने के लिए आप हमारे ऐप को डाउनलोड कीजिए..... यहां क्लिक कीजिए

बांसी  क्षेत्र के उसकी शुक्ल स्थित बाग में चल रहे श्री सीताराम शिवार्चन ज्ञान महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा व्यास पारसमणि महाराज ने कथा प्रवचन करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को दुनिया में कहीं आश्रय नही मिलता है, उसे सन्त अपनाते हैं।
          उक्त अवसर पर उन्होंने कहा कि जयन्त ने कौए के भेष में जाकर सीताजी के पैर में चोंच मारा, तब राम ने सीक का अग्नि बाण उसके पीछे छोड़ दिया। वह जब यह समझा कि यह कोई साधारण मानव नही हैं। ये साक्षात ब्रम्ह हैं, जिनके  बाण से बचना नामुमकिन है। वह पिता इंद्र के पास पहुंचा, लेकिन इंद्र ने उसे यह कहकर भगा दिया कि मैं कोई सहायता नही कर सकता हूं। जयन्त वहां से शिव बाबा, ब्रम्हाजी, अपनी माता सहित कई स्थानों पर राम द्वारा छोड़े गए बाण से रक्षा के लिए गुहार लगाया। लेकिन संसार में उसे किसी ने भी बचाने को कौन कहे आश्रय तक नही दिया। जब सन्त नारद जी ने यह देखा तो वे उसे स्वयं ही बलाये और आश्रय दिया। और उससे पूरी बात जान लेने के बाद वापस राम के ही शरण में जाने की सलाह दिया। जयन्त त्राहि माम् करता राम जी के शरण में पहुंचा, और उसका प्राण बचा। कथा व्यास ने कहा कि राम का वाण अमोघ होता है, जो एक बार छूट जाए तो विफल नही होता है, और जयन्त ने अपराध किया था। जिस पर राम ने उसे दण्ड देते हुए एक आंख फोड़ दिया। जिससे वह जीवनभर फिर इस तरह की घटना न करे।
‘रघुनन्दन राघव राम हरे, सियाराम हरे, सियाराम हरे’ के संकीर्तन पर श्रोता झूम उठे। हमेशा के लिए गंवा देना पड़ा। कथा में मुख्य यजमान ग्राम प्रधान चंद्रपाल शुक्ल, अष्टभुजा शुक्ल, श्याम शुक्ल, रामदेव शुक्ल, सुरेन्द्रनाथ शुक्ल, विजयपाल शुक्ल, अनिल कुमार जायसवाल, संतलाल अग्रहरी, सुनील चौधरी, नवीन त्रिपाठी आदि सहित तमाम श्रोता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महन्थ नीरज दास शास्त्री ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *