सिद्धार्थनगर एके -47 गायब, पांच सिपाही निलंबित एटीएस को सौंपी गई जांच, नेपाल से तो नही जुड़े हैं तार?

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इटवा ak 47
इटवा ak 47

— रायफल इशू  और जमा करते वक्त अभिलेख में दर्ज होते हैं नाम व समय, पुलिस क्यों छूपा रही बात?

एटीएस को मिली जांच, नेपाल सीमा से करीब  होने के कारण बेहद संवेदनशील है रायफल की गुमशुदगी

सिद्धार्थनगर।  जिले के इटवा थाने से एक एके 47 गायब होने के मामले में पुलिस अधीक्षक डॉ.धर्मवीर सिंह ने देर रात एसओ अनिल प्रकाश पांडेय, हेड कांस्टेबल विपिन कुमार भट्ट, सिपाही विमल किशोर मिश्र, हेड मुहर्रिर वीरेंद्र यादव व राम प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया। गत दिवस असलहों की गिनती के दौरान यह खुलासा हुआ था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने सोमवार देर रात को सभी को सस्पेंड करने के आदेश जारी किये। फिलहाल थाने की  ए.के. 47 रायफल के गायब होने से जिला ही नहीं प्रदेश पुलिस मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है। फिॅलहाल मामले की जांच एंटी टेरिरिस्ट स्कवायड (एटीएस) को सौंप दी गई है।

खबर है कि रविवार को इटवा थानों में रूटीन के तहत असलहों की गिनती हो रही थी। गिनती के दौरान थाने की एके 47 राइफल नही मिली। अभ्‍लेख के अनुसार रायफल लोडेड थी। उसे काफी तलाशा गया लेकिन वह नहीं मिली। अंत में माले की सूचना पुलिस अधीक्षक को धर्मवीर सिंह को दी गई। इतनी बड़ी घटना को सुन कर सोमवार अपरान्ह 4 बजे एस पी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन रायफल का पता न चला। अंत में पुलिस अधीक्षक ने इसी जिम्मेदारी  थानाध्यक्ष और उनके चार अधीनस्थों को सस्पेंड कर दिया।

   असलहों की सुरक्षा मे सामने आई बड़ी चूक

असलहों की सुरक्षा में इटवा पुलिस की बड़ी चूक सामने आई है। थाने से गोलियों से भरी एक एके 47 गायब हो गई। यह सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है।  हाईटेक दौर में बदमाशों से निपटने के लिए पुलिस महकमे में थाने स्तर पर गनर के लिए एक एके 47 दी जाती है। यह थाने के मालखाने में रखी जाती है। ड्यूटी के दौरान जवानों को इसे लिखा पढ़ी में दी जाती है। इतने चौकस प्रबंध के बावजूद इटवा थाने से गोलियों से भरी एके47 गायब हो गई। रविवार को बात सामने आई तो महकमे में हड़कंप मच गया। इस बारे में पूर्व थानाध्यक्षों से भी पूछ ताछ की जा रही है।

आखिर कहां चली गई एके 47 रायफल

एके 47 रायफल थाने से कब गायब हुई, यह कोई भी नहीं बता पा रहा है।  जब कि नियम यह है कि वह जिस भी पुलिस कर्मी को दी जाती है तो उसके नाम अभिलेख में दर्ज की जाती है। बाद में जब पुलिस कर्मी उसे वापस मालखाने में जमा करता है तो वह उसके आमद में दर्ज की जाती है। ऐसे में वह रायफल अंतिम बार किसे इशू हुई थी और उसके आमद में रायफल की वापसी दर्ज है या नहीं, यह अभिेलख से पता चलता सकता है। लेकिन हैरानी की बात यह है पुलिस इस तथ्य को सार्वजनिक नहीं कर रही है।

 नेपाल के मफियाओं के हाथ तो नहीं गई रायफल

 इटवा थाना ही नही समूचा जिला नेपाल सीमा से सटी होने के कारण बेहद संवेदन शील है। भारतीय अपराध जगत से नेपाल में बैठे मफियाओं  के संबंधों का अक्सर खुलासा होता रहा है। कई वर्ष पूर्व लखनऊ में नेपाल में रहने वाले एक युवक को पुलिस पकड़ भी चुकी है।  इसके अलावा नेपाल में दाऊद इब्राहीम ग्रुप के अलावा बबलू श्रीवास्तव, छोटा राजन गैंग की सक्रियता की खबरें भी आती रही हैं। इसलिए इस बिंदु को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

असलहे को लेकर थाने पर दिन भर रही हलचल

गायब असलहे को लेकर इटवा थाने में सोमवार दिनभर हलचल रही। पुलिस महकमे का हर कोई असलहे को ढूंढ़ने में चौकन्ना रहा। इस दौरान सीओ इटवा श्रीयष त्रिपाठी, शोहरतगढ़ दिलीप कुमार सिंह, इंस्पेक्टर अखिलानन्द उपाध्याय, अनिल कुमार पाण्डेय आदि मौजूद रहे।

एसपी ने कहा

इटवा थाने से एक लोडेड एके47 गायब है। इसकी तलाश की जा रही है। रविवार को ही थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी गई है। पुलिस अधीक्ष का कहना है कि मामले की जांच एटीएस के हाथों में सौंप दी गई है। जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।

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