अधूरी तैयारी: जर्जर बंधे मचाएंगे तबाही

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सिद्धार्थनगर : बाढ़ से बचाव के लिए हवा-हवाई कवायद शुरू हो गई है। सिचाई निर्माण खंड के चार बांधों में गैप हैं। यह गैप इतने बड़े हैं कि बाढ़ के समय जल प्रवाह में तबाही का मंजर सामने आ सकता है। पिछले बाढ़ के दौरान इन्हीं स्थानों पर कटान हुई थी। उसके बाद से गैप को भरा नहीं जा सका। बांध का गैप बांसी क्षेत्र के दो, उसका बाजार व डुमरियागंज क्षेत्र में एक-एक स्थान पर है। गैप भरने से संबंधित फाइल शासन स्तर पर स्वीकृति के लिए काफी दिनों से लंबित है।

बाढ़ से बचाव की तैयारियां शुरू हो गई है। अगस्त 2017 में आई बाढ़ के दौरान जिले के पांच स्थानों पर बांध कटे थे। इसमें सिचाई निर्माण खंड के चार बांध रहे। दो बांध राप्ती व इतने ही बांध बूढ़ी राप्ती नदी पर था। बाढ़ के समय तेज जलप्रवाह में भारी जन-धन की हानि हुई थी। बाढ़ समाप्त होने के बाद गैप भरने की कवायद शुरू हुई। आइसीडी ने 22.71 करोड़ का इस्टीमेट शासन को स्वीकृत के लिए भेजा था।

बांध में गैप बूढ़ी राप्ती के दाएं तट पर स्थित फत्तेपुर-खजूरडाड़ व असोगवा-नगवा बांध पर है। राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित बांसी-पनघटिया व भोजपुर-शाहपुर बांध में भी बड़े गैप बन गए थे। इन बड़े गैप से सैकड़ों गांव के प्रभावित होने की संभावना है। अधिशासी अभियंता आइसीडी आरके सिंह ने कहा कि 2017 में आई बाढ़ के दौरान निर्माण खंड के चार बांध कट गए थे। सभी कटान स्थलों पर बड़े गैप हो गए थे। गैप को भरने के लिए परियोजना तैयार कर शासन स्तर पर भेजा गया था। कुछ काम हुआ है, अभी काम होना बाकी भी है।

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