करिए शिकायत, उस्का पुलिस नहीं दर्ज करेगी मुकदमा

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सिद्धार्थनगर : जनपद पुलिस की कार्यप्रणाली अजीबो गरीब है। कहीं पर बिना परीक्षण के वह तत्काल मुकदमा पंजीकृत कर देती है तो कहीं पर इंसाफ के लिए लोग दर-ब-दर भटकते रहें, पुलिस सुनने वाली नहीं है। कुछ ऐसे ही राह पर उस्का पुलिस चल रही है। किसी भी घटना को लेकर वह पूर्व में ही अपना एक नजरिया तैयार कर लेती है और उसी आधार पर कार्रवाई करती है। छितरापार निवासी सोनू पुत्र श्रीराम की मौत गत दो जून को हो गई। मृतक के पिता इसे हत्या बता रहे हैं और उस्का पुलिस इसे दुर्घटना करार दे रही है। उसने उच्चाधिकारी से मामले की छानबीन के लिए गुहार लगाई है।

श्रीराम का कहना है कि उसके पुत्र को गांव के कुछ लोग बहला-फुसला कर ले गए और गांव के पूरब धोबहा घाट के पास वह शव छिपाने की तैयारी में थे। उन्होंने यह भी कहा कि उसकी विवाहित पुत्री अर्चना को सोनू ने मोबाइल पर जानकारी भी दी थी। इस सूचना के आधार पर वह खुद मौके पर पहुंचा और बेटे का शव देखा। उसका कहना है कि बेटे के चेहरे पर कई घाव थे। उसने आरोप लगाया है कि चाकू द्वारा उसके चेहरे पर घाव किया गया है। उसने यह भी आरोप लगाया है कि बाद में उस्का पुलिस मौके पर पहुंच गई थी और उसे शव पोस्टमार्टम कराने से मना किया है। वह अंतिम संस्कार के लिए जोर दे रही थी, पर जब वह नहीं माना तो पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। उसका आरोप है कि उस्का पुलिस उसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दे रही है। हालांकि उस्का पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट थाने पर है। वह कभी भी आकर इसकी फोटोकापी थाने से ले सकता है। फिलहाल यह परीक्षण का विषय है, पर सवाल यह है कि पुलिस अभी तक घटना का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कर रही है।

सुनीता की मौत को भी बता रही आत्महत्या

शुक्रवार शाम उस्का थाने के ग्राम जोगिया मजिगवां में सुनीता पुत्री रामकुमार की फंदे लटकती लाश देखी गई। पुलिस प्रथम दिन से ही इसे आत्महत्या बता रही है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटीमार्टम हैं¨गग आया है, पर सवाल यह है कि क्या घटना के बाद मृतका की जीभ पूरी तरह बाहर लटकी हुई थी। क्या मुट्ठी बंद थी। इसका अभी परीक्षण ही नहीं किया जा सका है। मृतका की मां प्रमिला घटना को लेकर आरोप लगा रही है। उसने पुलिस को तहरीर भी दिया है। बावजूद इसके पुलिस ने मुकदमा नहीं पंजीकृत किया है।

छितरापार में सोनू की मौत एक वाहन दुर्घटना में हुई है। पुलिस मौके पर गई भी थी। इसमें कई व्यक्ति घायल भी हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा गया था। मुकदमे की बात तो थानाध्यक्ष ही बता सकते हैं। सोनू के पिता तो पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं थे। यह तो उन्हें किसी तरह समझाया गया। फिर जाकर पोस्टमार्टम हो सका। सुनीता की मौत खुदकुशी है। पोस्टमार्टम में एंटीमार्टम इंजरी आया है। जीभ दोनों दांतों के बीच में फंसी है। यह सब पंचनामें में भी दाखिल किया गया है।

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