इटवा में नगर परिषद के वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमराई
इटवा नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में ठोस कचरे का प्रबंधन लगभग खत्म हो चुका है। कई गलियों में रोजाना निकलने वाला घरेलू तथा दुकानों से आया कचरा खुले में पड़ा रहता है, जिससे वार्डों में बदबू और गंदा पानी फैल रहा है। नालियां जाम होने से बारिश का पानी निकलने में बाधा हो रही है और सड़कों पर कीचड़ की परत बन रही है। निवासी अब खुद गलियां साफ करने और निकास व्यवस्था खोलने पर मजबूर हो रहे हैं, पर नगर परिषद की ओर से ठोस कार्रवाई का स्पष्ट ब्योरा नहीं मिल रहा।
यह स्थिति सफाई, जन स्वास्थ्य और नगर प्रशासन की जवाबदेह तीनों पर सवाल खड़े करती है। इटवा की गलियों में कचरा पहले इकट्ठा होता है, लेकिन नियमित निकास के बाद वह दूसरी जगह जमा होने लगता है। स्थानीय विकास की समस्या अब महफिल से आगे बढ़कर जनता की दैनिक जीवन से जुड़ गई है। ऐसी स्थानीय शिकायतों और प्रशासनिक मुद्दों की जानकारी अपना सिद्धार्थनगर के स्थानीय संवाद में भी सामने आती है।
नालियों में कचरा और सड़कों पर बदतूरती
बाजार के आसपास और घरेलू मोहल्लों में मिश्रित कचरे का ढेर लगा रहता है। निवासियों का कहना है कि सब्जी, फल, भोजन और प्लास्टिक सब एक ही स्थान पर इकट्ठा होते हैं, जिससे गीले कचरे का अलग संग्रह व्यवस्थित नहीं हो पाता। पशुओं के लिए छोड़ा गया भोजन और पत्तेदार सामग्री भी उसी कचरे में मिल जाती है। कतारें इतनी बढ़ जाती हैं कि उनके पास से गुजरना मुश्किल हो जाता है।
संकरी लेनों में बड़े सफाई वाहन के पहुंचने की व्यवस्था नहीं होने से कचरा को हाथ से ढोना पड़ता है। कई बार कर्मी आने के बाद भी ढेर को पूरी तरह नहीं हटा पाते और अगली बार नया कचरा उसी जगह जमा हो जाता है। नाली के मुहानों पर रखा कचरा बहते पानी को रोकता है। रात में इधर-उधर बिखरे कचरे से गलियों का इस्तेमाल करने वालों को टिप्पणी करनी पड़ती है।
बारिश के बाद यही दृश्य और बिगड़ जाता है। जमा कचरे से निकलने वाला गंदा पानी घरों के बाहर और सड़कों पर फैलता है। नालियां ठीक होने में कई दिन लगते हैं, जबकि बारिश का पानी तब तक सुबह से ही खड़े रहता है। गंभीर गर्मी में सड़कों पर पड़े कचरे से दुर्गंध इतनी अधिक होती है कि लोग घर से निकलने से कतराते हैं। सफाई की यह दैनिक खराबी सीधे निवासियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
वार्ड सफाई कर्मियों की कमी
वार्ड सफाई कर्मियों की उपस्थिति और कार्य का समय दोनों पर गंभीर आरोप हैं। निवासियों का कहना है कि कई वार्डों में नियुक्त कर्मी नियमित रूप से कचरा इकट्ठा नहीं कर पाते। जिस दिन कर्मी उपस्थित होते हैं, उस दिन भी गलियों में पहले से जमा अधिकांश कचरा रह जाता है। सफाई के बाद हुई जांच में सामान्यतः ढेर कम मिलता है, पर नगर परिषद की ओर से कर्मियों की उपस्थिति का नियमित लेखा सामने नहीं आता।
वार्ड में एक कर्मी को केवल कचरा उठाने का काम नहीं, बल्कि मलबा हटाने, नालियां साफ करने और अस्थायी ढेर की व्यवस्था करने का भी दायित्व दिया जाता है। कई बार कम संख्या के कर्मियों को अधिक वार्ड संभालने पर मजबूर किया गया है। काम के दबाव में उन्हें सड़क, नाली और कचरा सभी एक साथ संभालना पड़ता है। ऐसे हालात में न तो सफाई पूरी हो पाती है और न ही किसी गंभीर स्थिति के लिए कर्मी उत्तरदायी ठहरता है।
स्थानीय लोगों ने कर्मियों की भूमिका स्पष्ट करने और उनकी उपस्थिति सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है। वार्ड स्तर पर सफाई का समय, कचरा उठाने की स्थिति और शिकायतों पर कार्रवाई का एक सरल ब्योरा उपलब्ध होना चाहिए। मोबाइल संदेश या सूचना पट्ट के माध्यम से निवासी जब सफाई साप्ताहिक शुरू होती है, तो वे खुद भी निगरानी कर सकते हैं। इससे कर्मियों की उपस्थिति और जवाबदेही दोनों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उपकरण और कचरा संचालन में खामियां
कचरा हटाने के बाद भी सफाई का काम पूरा नहीं होता, क्योंकि उपकरणों और संचालन में गंभीर कमियां दिखाई देती हैं। कई वार्डों में पुराने कचरा पात्र टूटे हुए हैं और उनमें नालीदार व्यवस्था नहीं है। सफाई वाहनों की मरम्मत और ईंधन की व्यवस्था में देरी से कचरा कई घंटे एकत्र होता रहता है। चावल, मजदूरी और सुरक्षा उपकरणों की कमी कर्मियों को खुले कचरे के पास जाने से रोकती है।
वार्डों में कचरा उठाने की निश्चित समय-सारणी नहीं होने से समस्या बनी रहती है। कभी वाहन सुबह आते हैं, कभी दोपहर में और कभी ढाई दिन बाद, जिससे कचरा फैलने का समय बढ़ जाता है। एक ही वाहन में मलबा और घरेलू कचरा एक साथ भरा जाता है। नगर के बाहर कचरा ले जाने के बाद भी ढेर को सुरक्षित स्थान पर ढेरा नहीं जाता और उसे वहीं छोड़ दिया जाता है। ऐसा आरोप निवासियों ने किया है।
उपकरणों की खरीद और रखरखाव का रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है, जिससे खराब वाहन या कचरा पात्र लंबे समय तक सेवा से बाहर रहते हैं। सफाई सामग्री की सूची, मरम्मत की तारीख और वाहनों की वास्तविक उपयोग किसी एक सार्वजनिक ब्योरे में नहीं दिखता। नगर परिषद की आम बैठकों में भी यह विवरण सामान्यतः सामने नहीं आता। बिना उपकरणों के हिसाब के बजट और नियमित आवश्यकता का पता लगाना कठिन हो जाता है।
जवाबदेह व्यवस्था पर गंभीर सवाल
कचरे की समस्या को ठेकेदार, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग और नगर के बाहर निपटान व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों तक कई स्तरों पर देखा जाता है। हर स्तर अपने हिस्से से पहले को दूसरे पर छोड़ देता है। परिषद का कहना कि कचरा उठाया गया है, जबकि निवासी बताते हैं कि ढेर वहीं पड़ा है। किसी भी पक्ष के पास स्पष्ट उत्तर नहीं होता कि गली तक कचरा किस समय पहुंचेगा और निकास के बाद उसका क्या होगा।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि काम के आधार पर भुगतान हो। सफाई का रोजाना लेखा, कर्मियों की उपस्थिति, वाहन के प्रवेश का समय और निपटान स्थल की पुष्टि एक साथ दर्ज होनी चाहिए। अगर किसी वार्ड में निर्धारित सफाई पूरी नहीं होती, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का नियम पहले से तय होना चाहिए। ऐसा होने पर केवल आश्वासन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शिकायतों का समाधान भी अभी अधिकांशतः फोन और मौखिक दबाव पर टिका है। किसी शिकायत पर कार्रवाई हुई, इसका कोई लिखित प्रमाण निवासियों को नहीं मिलता। वार्ड स्तर पर शिकायत पर्जी, समाधान की समय-सीमा और दोषी पक्ष के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे निगरानी मजबूत होगी और बार-बार हो रही समस्या की पुनरावृत्ति भी रुकेगी।
स्वास्थ्य जोखिम और प्रशासन की प्रतिक्रिया
गंदा कचरा और खुले नालियां केवल गंदगी नहीं, बल्कि मच्छरों और संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा रही हैं। स्थिर या कम बहने वाला पानी डेंगू और मलेरिया के मच्छरों को पालने लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। मलबा और घरेलू कचरे से आने वाला जीवाणुजनित प्रदूषण गंभीर पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। बच्चों, वरिष्ठों और बीमार व्यक्तियों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सा केंद्रों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से स्थानीय सूचना जुटानी होगी। बुखार, उल्टी या पेट दर्द की शिकायतें आने पर उनके कारणों की जांच और आसपास की नालियों की सफाई एक साथ होनी चाहिए। कचरा ढेर के आसपास मच्छरों का नियंत्रण, नमूना संग्रहण और प्रभावित इलाकों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे बीमारी की रोकथाम केवल दवा देने तक सीमित नहीं रहेगी।
नगर परिषद प्रशासन को भी सफाई और स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय का स्पष्ट ढांचा तय करना होगा। कचरा उठाने का काम तभी बेहतर हो सकता है जब वार्ड की सफाई, नाली जाम होने की सूचना और बीमारी के लक्षण एक ही सूचना प्रणाली से जुड़ें। अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर उत्तर देने और कार्रवाई का सार्वजनिक ब्योरा देने की प्रक्रिया भी स्थापित करनी होगी। वार्डों में फैले कचरे और जाम नालियों के बीच अभी की स्थिति में जवाबदेही की कमी सबसे स्पष्ट है, और जवाबदेही के बिना सफाई सुधार का दावा विश्वसनीय नहीं होगा।