इटवा में पीएम किसान की दूसरी किस्त रुकने से लाभार्थी परेशान
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के कई लाभार्थियों ने दूसरी किस्त खाते में नहीं पहुंचने की शिकायत की है। किसानों का कहना है कि पहले चरण में पंजीकरण और पात्रता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी निर्धारित सहायता राशि नहीं मिली। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खेती से जुड़े खर्चों के बीच आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लाभार्थियों के अनुसार, बैंक खाते, आधार और भूमि अभिलेख से जुड़ी जानकारी जमा कराने के बावजूद भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। कुछ किसानों के आवेदन में सत्यापन लंबित दिख रहा है, जबकि कुछ के रिकॉर्ड में नाम, खाता संख्या या आधार संबंधी त्रुटि बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर किसानों ने संबंधित विभाग से जांच कर लंबित किस्त जारी कराने की मांग की है।
शिकायत के बाद भुगतान पर उठे सवाल
इटवा तहसील और आसपास के गांवों के किसानों की मुख्य शिकायत दूसरी किस्त को लेकर है। उनका कहना है कि योजना के तहत पात्र होने के बावजूद उनके बैंक खातों में राशि नहीं आई। कई लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें पहली किस्त मिलने की जानकारी थी, लेकिन अगली किस्त के समय भुगतान रुक गया। कुछ किसानों को मोबाइल संदेश नहीं मिला और बैंक खाते की जांच करने पर भी सहायता राशि दर्ज नहीं मिली।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त रोकने की शिकायत के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। भुगतान प्रक्रिया में भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन, आधार आधारित पहचान, बैंक खाते का विवरण और ई-केवाईसी की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। किसी एक स्तर पर जानकारी अधूरी रहने से किस्त लंबित हो सकती है। इसलिए हर लाभार्थी के मामले की अलग जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक त्रुटि सामने आ सके।
योजना के तहत किसानों को मिलने वाली सहायता
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को सालाना छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। खेती के मौसम में बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक और मजदूरी जैसे खर्चों के लिए यह रकम छोटे किसानों के लिए उपयोगी मानी जाती है।
किस्त का भुगतान तभी आगे बढ़ता है, जब लाभार्थी का रिकॉर्ड केंद्र और राज्य स्तर के संबंधित डाटाबेस में सही पाया जाए। भूमि स्वामित्व की जानकारी, आधार का प्रमाणीकरण और बैंक खाते का आधार से जुड़ाव इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इटवा क्षेत्र में जिन किसानों की दूसरी किस्त नहीं आई है, उनके लिए केवल बैंक में पूछताछ करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें आवेदन की स्थिति और अभिलेखों का भी मिलान कराना होगा।
ई-केवाईसी और भूमि अभिलेख की भूमिका
कई बार लाभार्थी का नाम योजना की सूची में होने के बावजूद ई-केवाईसी पूरी नहीं होने से भुगतान रुक जाता है। आधार में दर्ज नाम और आवेदन में दर्ज नाम की वर्तनी अलग होने पर भी सत्यापन अटक सकता है। इसी तरह बैंक खाते में नाम, खाता संख्या या आईएफएससी कोड की गलती भुगतान असफल होने का कारण बन सकती है।
भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी इस योजना में अहम है। खतौनी या संबंधित अभिलेख में किसान का नाम स्पष्ट न होने, उत्तराधिकार का नामांतरण लंबित रहने अथवा संयुक्त भूमि के विवरण में विसंगति होने पर आवेदन जांच में जा सकता है। इटवा के किसानों को लेखपाल, कृषि विभाग के कर्मचारी या संबंधित जनसेवा केंद्र के माध्यम से अपने अभिलेखों का मिलान कराना चाहिए। सुधार के बाद रिकॉर्ड दोबारा सत्यापन के लिए भेजा जा सकता है।
बैंक खातों में भुगतान अटकने की वजह
किस्त स्वीकृत होने के बाद भी बैंक स्तर पर तकनीकी कारणों से राशि खाते में नहीं पहुंचती। निष्क्रिय खाता, गलत खाता संख्या, बैंक का विलय, आधार सीडिंग का अभाव या खाते में लेनदेन संबंधी रोक इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। कई ग्रामीण लाभार्थियों के पास एक से अधिक बैंक खाते होते हैं, जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि पैसा किस खाते में भेजा गया है।
किसानों को अपनी बैंक शाखा में जाकर खाते की स्थिति, आधार लिंक और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की सुविधा की पुष्टि करनी चाहिए। बैंक से भुगतान असफल होने की जानकारी मिलने पर संबंधित विवरण को योजना के रिकॉर्ड में ठीक कराना जरूरी है। जिन किसानों ने हाल में खाता बदला है, उन्हें पुराने आवेदन में दर्ज बैंक विवरण की भी जांच करनी चाहिए। बैंक पासबुक की अद्यतन प्रविष्टि इस प्रक्रिया में उपयोगी प्रमाण बन सकती है।
स्थानीय स्तर पर जांच और समाधान की जरूरत
लाभार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, कृषि विभाग और राजस्व विभाग के बीच समन्वय जरूरी है। गांववार सूची तैयार करके यह देखा जा सकता है कि किन किसानों की किस्त ई-केवाईसी के कारण रुकी है और किन मामलों में भूमि या बैंक रिकॉर्ड की समस्या है। इससे किसानों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।
इटवा क्षेत्र में शिविर लगाकर आवेदन स्थिति की जांच, आधार प्रमाणीकरण और बैंक विवरण सुधारने की व्यवस्था की जाए तो लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण हो सकता है। किसानों को यह भी बताया जाना चाहिए कि ऑनलाइन स्थिति में दिखाई देने वाले अलग-अलग संदेशों का अर्थ क्या है। “भुगतान लंबित”, “रिकॉर्ड सत्यापनाधीन” और “भुगतान असफल” जैसी स्थितियों के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
किसान शिकायत दर्ज कराने के तरीके
लाभार्थी सबसे पहले प्रधानमंत्री किसान पोर्टल पर अपनी स्थिति देख सकते हैं। इसके लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर, आधार संख्या या बैंक खाते का उपयोग किया जाता है। आवेदन में दर्ज नाम, किस्त की स्थिति और भुगतान से जुड़ी जानकारी जांचने के बाद किसान समस्या का स्क्रीनशॉट या प्रिंट सुरक्षित रख सकते हैं। इससे विभागीय शिकायत दर्ज कराने में सुविधा होती है।
ऑनलाइन व्यवस्था के साथ किसान कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय, तहसील या जनसेवा केंद्र पर भी संपर्क कर सकते हैं। शिकायत देते समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी की प्रति, पंजीकरण विवरण और मोबाइल नंबर साथ रखना उपयोगी रहेगा। समाचार पोर्टल से जुड़ी स्थानीय सूचना या संपर्क संबंधी जानकारी के लिए किसान संपर्क माध्यम का सहारा भी ले सकते हैं, हालांकि सरकारी भुगतान सुधारने की औपचारिक प्रक्रिया संबंधित विभाग और बैंक के माध्यम से ही पूरी होगी।
पारदर्शिता से दूर हो सकती है किसानों की परेशानी
किस्त रुकने के मामलों में सबसे बड़ी समस्या जानकारी के अभाव की होती है। किसान को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि उसका आवेदन किस स्तर पर लंबित है और सुधार के लिए किस कार्यालय में जाना है। यदि विभाग गांववार लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करे और लाभार्थियों को एसएमएस या स्थानीय सूचना के माध्यम से कारण बताया जाए, तो भ्रम कम किया जा सकता है।
किसानों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होने से योजना में भरोसा बढ़ेगा। पात्र लाभार्थियों के रिकॉर्ड में त्रुटि मिलने पर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए और सही पाए गए आवेदनों की लंबित किस्त नियमानुसार जारी की जानी चाहिए। इटवा क्षेत्र में सामने आई शिकायतें यह संकेत देती हैं कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था के साथ स्थानीय सहायता तंत्र को भी मजबूत करने की आवश्यकता है। इससे योजना की राशि वास्तविक पात्र किसानों तक बिना अनावश्यक देरी पहुंच सकेगी।