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नौगढ़ में महिला मतदान प्रतिशत सबसे कम, चुनाव आयोग चिंतित

बस्ती लोकसभा क्षेत्र के नौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा निर्वाचन के दौरान महिला मतदान प्रतिशत सबसे कम दर्ज हुआ। उपलब्ध निर्वाचन आंकड़ों में पुरुष मतदाताओं की भागीदारी महिलाओं की भागीदारी से स्पष्ट रूप से आगे रही। इस अंतर ने चुनाव आयोग का ध्यान खींचा है और वर्षित मतदान प्रतिशत पर सवाल खड़े किए हैं।

महिला मतदान की कम दर को हल्के में लेना गलत होगा। पंजीकृत महिला मतदाताओं की संख्या, उनकी पहुंच, मतदान केंद्र की दूरी और सामाजिक परिस्थितियां इस अंतर को प्रभावित करती हैं। नौगढ़ के लिए मायने रखने वाला यह है कि आम जनता के एक बड़े हिस्से तक लोकतंत्र की प्रक्रिया पहुंचना और उसमें शामिल होना सरल बने।

स्थानीय रिपोर्टिंग से पता चलता है कि मुद्दा केवल कम वोट डालने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है। कई बार महिलाओं का नाम मतदाता सूची में होता है, लेकिन जानकारी, दस्तावेजों की उपलब्धता, प्रवास की स्थिति और परिवार की जिम्मेदारियां मतदान को कठिन बना देती हैं। आयोग की चिंता को समझने के लिए इन व्यावहारिक कारणों और जवाबदेह व्यवस्था पर एक साथ ध्यान देना होगा।

आंकड़ों में सामने आया लैंगिक अंतर

नौगढ़ का परिणाम बस्ती लोकसभा क्षेत्र के बांसी, दुमरियागंज, इटवा और नौगढ़ जैसे विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में महत्वपूर्ण है। यहां महिला मतदान प्रतिशत अन्य स्थानीय क्षेत्रों से पीछे रहा। आंकड़ों की तुलना करते समय मतदान केंद्रों की संख्या और मतदाता सूची के आकार जैसे बुनियादी मानक भी ध्यान में रखने चाहिए, क्योंकि अलग-अलग संरचनाओं का असर अलग होता है।

मतदान प्रतिशत और कुल मतदाताओं की संख्या में स्पष्ट अंतर है। कम मतदान प्रतिशत का अर्थ यह नहीं कि बहुत कम महिलाएं वोट करने आईं। दर मतदाता सूची में दर्ज महिलाओं के सापेक्ष मापी जाती है। मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस समीक्षा का दोबारा सत्यापन भी जरूरी है, ताकि वास्तविक पहुंच की कमी छिपे नहीं।

चुनाव आयोग की चिंता का आधार सामान्य रूप से मतदान की गुणवत्ता और मतदाता सहभागिता है। जहां महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रहती है, वहां मतदान केंद्र स्तर पर कारणों की पहचान और सुधार की स्थिति की समीक्षा अधिक आवश्यक हो जाती है। पिछले निर्वाचनों से तुलना भी इसलिए जरूरी है कि अंतर एक बार की परिस्थिति था या लगातार बनी हुई रुझान है।

मतदान सक्रियता को रोकने वाली स्थितियां

नौगढ़ के अधिकांश गांवों में मतदान केंद्र अलग-अलग बिखरे इलाकों में होते हैं। वृद्ध महिलाओं, दिव्यांग मतदाताओं और कम चलने-फिरने वाले लोगों के लिए दूरी, इंतजार और पहुंच की कठिनाई वास्तविक समस्या हो सकती है। मतदान के दिन खेत, दुकान या घर की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाएं अक्सर अपनी सुविधा के अनुसार समय नहीं चुन पातीं।

कृषि या रोजगार के लिए बाहर जाने वाले परिवारों में मतदाता अक्सर मतदान केंद्र के पास रहने वाले रिश्तेदारों के साथ संपर्क करते हैं। जिसके पास पहले से दस्तावेज नहीं हैं, उसके लिए सूची में नाम जोड़ना या पता बदलना परेशानी पैदा करता है। प्रवासी महिला मतदाताओं की पहचान और उनके पास मतदान का अवसर मिलने की स्थिति को स्पष्ट किए बिना इस समस्या का आकलन पूरा नहीं होता।

कभी-कभी महिलाएं मतदान केंद्र पर जाने से हिचकिचाती हैं क्योंकि उन्हें प्रक्रिया, पहचान संबंधी आवश्यकताओं या मतदान के समय की जानकारी पर पूरी तरह भरोसा नहीं होता। सोशल मीडिया पर फैली असत्य सूचनाओं से भी घबराहट बढ़ सकती है। ऐसी शिकायतों को दर्ज करने, जांचने और मिथकों का स्पष्ट खंडन करने का काम संबंधित अधिकारियों का जिम्मा है।

राजनीतिक प्रचार में महिलाओं की भूमिका

महिला मतदान कम होने के कारण महिलाओं के बीच एक जैसे नहीं होते। कम शिक्षा, आर्थिक निर्भरता, जाति के आधार पर भेद, परिवार में पुरुषों की राय पर निर्भरता और राजनीति में एकतरफा पहुंच अलग-अलग महिलाओं के निर्णय को प्रभावित करते हैं। पहली बार मतदान करने वाली युवा महिलाओं को सही प्रक्रिया की जानकारी और सुरक्षित माहौल दोनों जरूरी लगते हैं।

राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि प्रचार में महिलाओं को केवल उपस्थिति का प्रतीक न बनाएं। स्थानीय महिलाओं से उनकी समस्याओं पर बात, सेवाओं की गुणवत्ता और विकास के प्रश्नों पर चर्चा और उन्हें निर्णय लेने की वास्तविक जगह मिले। महिला उम्मीदवारों की भूमिका भी इससे जुड़ी है; वे महिलाओं तक संदेश पहुंचाने में प्रभावी साबित हो सकती हैं।

पंचायत प्रतिनिधि, महिला स्व सहायता समूह, शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी और स्थानीय युवा महिलाएं जनसंख्या से सीधे जुड़े संदेश दे सकते हैं। इन संवादों में सरकारी योजनाओं का प्रचार करने की बजाय मतदान की प्रक्रिया, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निवारण की जानकारी दी जानी चाहिए। महिलाओं का वोट किसी एक दल के प्रति वफादारी नहीं, अपने अधिकार के प्रयोग का मामला है।

प्रशासन की तैयारी और जवाबदेही

जिला निर्वाचन अधिकारी और प्रशासन को नौगढ़ में महिला मतदान की कमी को केवल अभियान के जिम्मेदारों की कमी न मानकर व्यवस्था की चुनौती मानना चाहिए। मतदान केंद्रवार महिला मतदाताओं के परिवारों, वृद्ध और दिव्यांग महिलाओं, प्रवासियों तथा नए पते के मामलों की जानकारी पहले से तैयार होनी चाहिए। बूथ स्तर पर यह समझने से अधिकारी संभावित बाधाओं के अनुसार कदम उठा पाएंगे।

मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण में महिला मतदाताओं के अधिकार, वोट देने की स्वतंत्रता और सहायता की जरूरत वाले लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार शामिल करना चाहिए। मतदान केंद्र पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था और सहायता केंद्र उपयोगी कदम हैं। पुलिस, सेतु और प्रशासन की संयुक्त तैयारी से महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल बनाया जा सकता है।

स्थानीय घटना, शिकायत या सूचना के लिए पाठक संपर्क पृष्ठ के जरिए संपादन तक संपर्क कर सकते हैं। प्रशासन की जवाबदेही के लिए मतदान से पहले की कार्रवाई, मतदान के दिन की स्थिति और बाद की समीक्षा अलग-अलग दर्ज करनी चाहिए। इससे असफलता के कारण दस्तावेज में दिखेंगे और अगली बार के लिए सुधार का ठोस आधार मिलेगा।

निर्वाचन के बाद की ईमानदार समीक्षा

निर्वाचन के बाद की समीक्षा में मतदान केंद्रवार महिला मतदान की सूची बनाना सबसे उपयोगी पहला कदम है। ग्रामीण और शहरी केंद्रों, विशेष संदर्भित अनुसूची, पुरुष और महिला केंद्रों के बीच अंतर देखा जाना चाहिए। इससे पता चलेगा कि कमी किसी बड़े भौगोलिक इलाके से जुड़ी है या अधिकांश मतदान केंद्रों में एक जैसी दर है।

आंकड़ों की सीमाओं को भी स्वीकार करना चाहिए। एक निर्वाचन की दर से कारण तय नहीं होता और मतदाता सूची में संभावित त्रुटियां भी प्रभाव डालती हैं। पिछले कई वर्षों के आंकड़े, मतदान केंद्रों की भौगोलिक दूरी और स्थानीय साक्ष्यों को मिलाकर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। सार्वजनिक रिपोर्ट में तथ्य, विश्लेषण और अभी अनसुलझे प्रश्न स्पष्ट रूप से अलग किए जाने चाहिए।

मतदान प्रतिशत की तुलना और रिपोर्टिंग के सामान्य संदर्भ के लिए व्यापक समीक्षा भी उपयोगी रह सकती है। स्थानीय स्तर पर यह समीक्षा तब अधिक अर्थ रखती है जब आम लोगों, मतदान कर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बातें शामिल हों। महिला मतदान के मुद्दे पर असरदार चर्चा से राजनीतिक दलों और प्रशासन की प्रतिक्रिया भी स्पष्ट होगी।

आगामी चुनावों के लिए ठोस कार्रवाई

अगले चुनाव से पहले मतदाता सूची पर महिलाओं की विशेष समीक्षा की जानी चाहिए। स्थानीय निवासियों, प्रवासी परिवारों और नए पते वाली महिलाओं की सूची मिलाने से कमी की असली वजह तक पहुंचना संभव होगा। इस समीक्षा को सार्वजनिक करने और कारण बताने से आयोग की चिंता का जवाब भी स्पष्ट होगा।

यह कार्य किसी एक विभाग का नहीं है। पंचायती संस्थाएं, स्वास्थ्य विभाग, महिला स्व सहायता समूह, शिक्षा संस्थानें और स्थानीय युवा संगठन साझा जिम्मेदारी निभा सकते हैं। निर्वाचन प्रचार के दौरान सरकारी संसाधनों का उपयोग चुनाव नीति और आचरण संहिता की सीमाओं के भीतर होना चाहिए।

सफलता का मापक केवल बड़ी मतदान दर नहीं है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि महिलाओं को अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिले। आयोग और प्रशासन की चिंता का अर्थ नौगढ़ को अधिक सक्रिय मतदान की ओर ले जाने वाला बदलाव है। महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी, तो निर्वाचन की गुणवत्ता और लोकतंत्र पर भरोसा भी बेहतर होगा।