शोहरतगढ़ के आंगनवाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार का वितरण हुआ बाधित
सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ ब्लॉक में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों पर पिछले कई सप्ताह से पूरक पोषण आहार की नियमित आपूर्ति बाधित है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित इन केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को मिलने वाला टेक होम राशन तथा गर्म भोजन पिछले एक माह से अधिक समय से वितरित नहीं हो पाया है। कुपोषण के मामलों से जूझ रहे पूर्वांचल में यह स्थिति सुपोषण अभियान के लिए चिंता का विषय बन गई है।
स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार जिला मुख्यालय से राशन की नई खेप आने में विलम्ब हो रहा है और कई केंद्रों पर पिछले माह का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है। हितग्राहियों की सूची में दर्ज परिवारों को अब खाली हाथ लौटाया जा रहा है, जिससे बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर दिखने लगा है। इस बीच स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संगठन और जनप्रतिनिधि जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
यह मुद्दा ऐसे समय में प्रकाश में आया है जब राज्य सरकार सुपोषण अभियान के तहत कुपोषण दर को नीचे लाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। शोहरतगढ़ क्षेत्र में सक्रिय गैर सरकारी संस्थाओं ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की तर्ज पर आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता जताई है। इसी जिले से जुड़े एक अन्य प्रशासनिक फैसले की जानकारी ब्लॉक प्रमुख चुनाव की तैयारी पर भी जारी की जा चुकी है।
आपूर्ति ठप होने की पृष्ठभूमि और समयरेखा
शोहरतगढ़ ब्लॉक में आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार की आपूर्ति पिछले दो महीनों से रुक-रुक कर प्रभावित होती रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सितंबर माह में राज्य स्तर पर टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण आपूर्तिकर्ता फर्म को नई दरों पर कार्य आवंटित किया गया था। इस प्रक्रियात्मक बदलाव के बाद परिवहन और भंडारण व्यवस्था में आई अड़चनों के चलते जिलों तक राशन की ढुलाई बाधित हो गई है।
स्थानीय स्तर पर आंगनवाड़ी पर्यवेक्षकों ने जानकारी दी कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में कुछ केंद्रों पर आंशिक स्टॉक पहुंचा था, किंतु नवंबर की शुरुआत से आपूर्ति पूरी तरह ठप है। केंद्र संचालिकाओं के पास पंजीकृत बच्चों की संख्या के अनुरूप अनाज मौजूद नहीं है, इसलिए हितग्राहियों को बिना राशन के लौटाया जा रहा है। हालांकि कुछ केंद्रों ने अपने स्तर पर सामुदायिक सहयोग से बच्चों को हल्का नाश्ता उपलब्ध कराया है, पर यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं है।
ग्राम पंचायतों में भी इस स्थिति पर चिंता जताई जा रही है क्योंकि अनेक गरीब परिवार आंगनवाड़ी केंद्रों से मिलने वाले टेक होम राशन पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को विधानसभा सत्र के दौरान उठाने की तैयारी की है। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में आपूर्ति की स्थिति से शोहरतगढ़ की तुलना का आकलन अगले अनुभाग में विस्तार से किया गया है।
हितग्राहियों पर पड़ रहे असर की विस्तृत तस्वीर
पोषण आहार की आपूर्ति बंद होने का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बच्चों के पोषण के लिए पूरी तरह सरकारी योजना पर निर्भर थे। शोहरतगढ़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों में पंजीकृत बच्चों की कुल संख्या लगभग सत्रह हजार है, जिनमें से अधिकांश को पिछले कई सप्ताहों से पोषक अनाज नहीं मिल पाया है। रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके परिवारों की महिलाएं इस कमी की सबसे अधिक शिकार हो रही हैं।
गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को मिलने वाला पोषाहार भी नहीं पहुंच पाया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका गहरा रही है। स्थानीय आशा कार्यकर्ताओं ने पुष्टि की है कि उनके पास आने वाली कई गर्भवती महिलाओं ने हाल के दिनों में पोषक तत्वों की कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है।
सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि जिन बच्चों को पहले नियमित रूप से दलिया, खिचड़ी और अंडे जैसे पोषक भोजन मिलते थे, अब उनकी आंगनवाड़ी में उपस्थिति में भी कमी देखी जा रही है। अभिभावक बच्चों को पोषक भोजन उपलब्ध कराने में असमर्थ होने के कारण उन्हें केंद्र पर भेजने में हिचक रहे हैं। इस स्थिति ने कुपोषण के दुष्चक्र को और गहरा बनाने का खतरा पैदा कर दिया है। आंगनवाड़ी सेवा योजना के दीर्घकालिक लक्ष्यों पर इसका असर पड़ना तय माना जाता है।
पूर्वांचल के जिलों से तुलना में शोहरतगढ़ की स्थिति
पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार की आपूर्ति की तस्वीर एक समान नहीं है। कुछ जिलों में आपूर्तिकर्ता फर्मों ने समय पर माल की ढुलाई सुनिश्चित की है जबकि अन्य में अभी भी अड़चनें बनी हुई हैं। शोहरतगढ़ सहित आसपास के कुछ जिलों की स्थिति का विवरण इस प्रकार है:
| जिला/ब्लॉक | पंजीकृत बच्चों की संख्या (अनुमानित) | आपूर्ति की स्थिति | प्रभावित हितग्राही अनुमान |
|---|---|---|---|
| शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) | 17,000 से अधिक | पूर्णतः बंद | 12,000 से 15,000 |
| बलरामपुर | 19,500 | आंशिक | 7,000 से 8,000 |
| बस्ती | 21,200 | सामान्य | 2,000 से 3,000 |
| संतकबीरनगर | 15,800 | आंशिक | 5,000 से 6,000 |
| महाराजगंज | 23,400 | सामान्य | 1,500 से 2,000 |
प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट है कि शोहरतगढ़ की स्थिति क्षेत्र के अन्य जिलों की तुलना में अधिक गंभीर है। बस्ती और महाराजगंज में सामान्य आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, वहीं बलरामपुर तथा संतकबीरनगर में आंशिक समस्या देखी जा रही है। शोहरतगढ़ में पूर्णतः आपूर्ति बंद होने के कारण यहां सबसे अधिक बच्चे और माताएं प्रभावित हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अक्टूबर माह में कुछ केंद्रों पर पुराने स्टॉक का वितरण किया गया था, जो अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। आपूर्तिकर्ता फर्म ने परिवहन लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए अनुबंध की समीक्षा का अनुरोध किया है, जिसके कारण नई खेप के परिवहन में देरी हो रही है। इस मुद्दे से अलग एक स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई की रिपोर्ट सिद्धार्थनगर में अवैध खनन पर विभाग की कार्रवाई पर भी प्रकाशित की जा चुकी है।
प्रशासनिक पक्ष, सामाजिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक आयाम
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राज्य स्तर से आपूर्ति की कड़ी में जो अड़चनें आई हैं उन्हें दूर करने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी में कहा गया है कि आपूर्तिकर्ता फर्म को निर्धारित समय सीमा में माल भेजने के निर्देश दिए गए हैं और अनुबंध की शर्तों के अनुसार जुर्माने की कार्रवाई भी विचाराधीन है। जिलाधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में एक समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें आपूर्तिकर्ता फर्म, विभागीय अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
ब्लॉक स्तर पर आंगनवाड़ी पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि विभागीय पोर्टल पर राशन प्राप्ति की पुष्टि नहीं हो पा रही है, जिससे हितग्राहियों का डाटा अपडेट नहीं हो सका है। कुछ पर्यवेक्षकों ने यह भी बताया कि स्थानीय राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी जिला प्रशासन से शिकायत की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक आपूर्ति पुनः बहाल होने की संभावना है। प्रशासन का यह भी कहना है कि हितग्राहियों को भोजन से वंचित नहीं किया जाएगा और वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सामुदायिक रसोई चलाने का भी विचार किया जा रहा है। इसी प्रकार की एक अन्य क्षेत्रीय खबर तिंघिर प्रेस पर भी प्रकाशित हुई है, जिसमें आसपास के जिलों में आपूर्ति की स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार की आपूर्ति बंद होने का प्रश्न अब राजनीतिक आयाम भी ग्रहण कर रहा है। क्षेत्र की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के स्थानीय नेताओं ने इसे सरकार की उपेक्षा बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। विपक्षी दलों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली की कमी बताया है। इस बीच स्थानीय सांसद और विधायक प्रतिनिधि भी मामले की जानकारी ले रहे हैं। सामाजिक स्तर पर गैर सरकारी संगठनों ने अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी है और क्षेत्र की कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं ने दान अभियान चलाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषक भोजन की व्यवस्था करने का प्रयास किया है।
पोषण आपूर्ति बहाली के लिए आवश्यक कदम
शोहरतगढ़ में पोषण आहार आपूर्ति की बहाली और भविष्य में ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई कदम आवश्यक हैं। इस दिशा में त्वरित प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ दीर्घकालिक नीतिगत सुधार भी जरूरी हैं।
- विभागीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और आपूर्तिकर्ता फर्मों का चयन पूर्व निर्धारित मानकों के अनुसार पारदर्शी रूप से सुनिश्चित किया जाए।
- जिला स्तर पर एक अलग से पूरक पोषण आहार की निगरानी इकाई गठित की जाए जो मासिक आधार पर केंद्रों की आपूर्ति की समीक्षा करे और अनियमितताओं की तुरंत रिपोर्ट करे।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल पोर्टल पर वास्तविक समय के आधार पर आपूर्ति की पुष्टि करने का अधिकार दिया जाए, जिससे हितग्राहियों का डाटा पारदर्शी रूप से अपडेट हो सके।
- हितग्राहियों की संख्या के अनुसार भंडारण क्षमता बढ़ाई जाए ताकि किसी भी अड़चन की स्थिति में एक माह का बफर स्टॉक आसानी से उपलब्ध रहे।
- ग्राम पंचायत स्तर पर पोषण समिति का गठन किया जाए जो आपूर्ति की निगरानी के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था का भी प्रबंधन करे और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करे।
इन उपायों को समन्वित रूप से लागू कर शोहरतगढ़ में पोषण आपूर्ति की बहाली सुनिश्चित की जा सकती है।