जुगाड़ के सहारे सीएचसी से मिल रही स्वास्थ्य सेवाएं

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सिद्धार्थनगर: इटवा सीएचसी पूरी तरह से जुगाड़ के भरोसे चल रही है। यहां न तो ओपीडी के लिए भवन है और न ही इमरजेंसी के लिए। कर्मचारियों के रहने के लिए आवास तक नहीं हैं। जिसके चलते स्वास्थ्य कर्मियों के साथ साथ यहां आने वाले मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। तीन सौ से अधिक गांव को इलाज की सुविधा मयस्सर कराने वाली सीएचसी लंबे समय से सुविधाओं के इंतजार में है।

इटवा सीएचसी के वर्षों पहले बने भवन पूरी तरह से जर्जर होकर गिर रहे हैं। यहां जैसे तैसे लोगों को स्वास्थ्य सेवा देने का काम चल रहा है। ओपीडी के लिए परिसर में कोई भवन नहीं है। पुराने हो चुके भवन में नीचे वार्ड बने हैं तो उपरी तल पर प्लाइवुड से पार्टिशन कर ओपीडी संचालित होती है। आने वाले मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था यहां नहीं है।

इमरजेंसी के लिए भवन नहीं होने के चलते बड़े बाबू के आफिस को ही इमरजेंसी की शक्ल दे दी गई है। सबसे खराब हाल में चिकित्सकों और कर्मचारियों के आवास हैं जो कब गिर जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। तैनात डाक्टर तो मजबूरी में यहां रात्रि रुकते हैं,लेकिन बाकी कर्मचारी आवास खस्ताहाल होने के चलते कस्बे में ही किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। सीएचसी को सुरक्षित रखने वाली चाहरदीवारी ध्वस्त हो चुकी है,लेकिन जिम्मेदार मौन हैं। यहां नए भवन निर्माण के लिए रिपोर्ट पांच वर्ष पहले जा चुकी है,लेकिन आजतक इसके लिए बजट नहीं अवमुक्त हुआ।सीएमओ ने कहा रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। स्वीकृति मिलने पर जरूरी कार्य कराए जाएंगे।

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