खटारा गाड़ियों मुख्य मार्ग पे बेखौफ रूप से चल रही है

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(समाचार)सिद्धार्थनगर(नीतीश गुप्ता) जिले के प्रमुख सड़को पे अबैध रूप से खटारा गाड़िया चल रही है जिससे सड़क पे दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है
आज यहां यह जानकारी देते हुए सूत्रो ने बताया है कि जिले के प्रमुख सड़को पर इन दिनो दौड़ रहे लगभग 5 हजार खटारा वाहनों ने प्रदूषण की समस्या पैदा कर दिया है। परन्तु विभागीय उदासीनता के चलते उक्त वाहन सड़को पर फर्राटा भर रहे है। तथा इन खटरा वाहनों पर सफर करने वाले अपनी जान जोखिम में डाल कर यात्रा करने पर विवश है। जिले के प्रमुख मार्गो सिद्धार्थनगर , डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर बढ़नी, सिद्धार्थनगर बांसी, सहित अन्य मार्गो पर चलने वाले लगभग 5 हजार वाहन अपनी लाइफपार कर चुके है।
उक्त वाहन फिटनेस से लेकर इंजन तक मानको की कसैटी पर पूरी तरह खरे नही उतर रहे है। बावजूद इसके विभागीय उदासीनता के कारण उक्त वाहन सड़को पर फर्राटा भरते हुए नजर आ रहे है। उक्त वाहनो पर यात्रा करने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर सफर करने पर मजबूर तो है ही। परन्तु इन वाहनो से निकलने वाला जहरीला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। जो लोगो के स्वास्थ्य के लिये भी काफी खतरनाक साबित हो रहा है। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा कभी वाहन चेंकिग के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है।
परन्तु चेकिंग के दौरान जो वाहन पकडे जाते है उनसे जुर्माना भरवा कर छोड दिया जाता है। फिटनेस, रजिस्ट्रेशन तथा बकाया कर वसूली के लिये प्रयासरत रहन ेवाला विभाग प्रदूषण फैला रहे खटारा पाहनों से नकेल कसने से कतरा रहा है।जबकि नियम यह है कि सड़क पर चलते समय प्रत्येक वाहन चालक के पास प्रदूषण रहित प्रमाण पत्र अवश्य होना चाहिये। जिसकी विभाग द्वारा समय-समय पर जांच भी की जानी चाहिये। परन्तु करीबी सूत्रों की माने तो विभाग द्वारा कार्यवाही तेज होने पर इन खटरा वाहनों के मालिकों द्वारा सुविधा शुल्क अदा कर वाहन प्रदूषण रहित प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया जाता है। तथा पुलिस वाहन चेंकिग के नाम पर आरसी, इन्शोरेंस, ड्राइविंग लाइसेन्स तथा हेलमेट की जांच की जाती है। कभी भी वाहन चालक से प्रदूषण रहित प्रमाण पत्र मांगा ही नही जाता है। ऐसे में उक्त खतरा वाहन सड़को पर खूब फर्राटा भर रहे है।
जिले में अवैध और खटारा वाहनो के संचलन से प्रदेश सरकार को रोज ही लाखो रूपये के राजस्व क्षति का सामना करना पड़ रहा है।

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