विरासत की रक्षा के सजग प्रहरी रहे राजा रूद्र प्रताप सिंह

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रवीन्द्र श्रीवास्तव बांसी।
बांसी राजघराने के राजा बहादुर राजा रूद्र प्रताप सिंह उर्फ लाल साहेब न केवल बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे,बल्कि किसी भी समस्या पर वे जल्दबाजी में कोई निर्णय कभी नही लेते थे। काफी सूझबूझ से ही उन्होने इतनी बडी रियासत की जिम्मेदारी बखूबी निभाई तथा बाप दादाओं से मिली विरासत की रक्षा करने में कभी भी कोई चूक नही की। आज उनके न रहने से बांसी क्षेत्र की जनता अपने को असहाय महसूस कर रही है। कंधार विमान अपहरण कांड के साक्षात गवाह भी राजा रूद्र प्रताप सिंह रहे।

 

सेना की नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होने भले ही दिल्ली में ही अपना आवास बनाया,लेकिन उसका नाम उन्होने ‘‘बांसी हाउस‘‘ ही रखा। दिल्ली में रहने के बावजूद भी बांसी क्षेत्र की जनता की समस्या से हमेशा रूबरू होते रहे,तथा अपने विधायक पुत्र राजकुमार जय प्रताप सिंह से हर समस्या को दूर करवाने का निर्देश देते थे। राजा रूद्र प्रताप सिंह के बाबा राजा लाल रतन सेन सिंह द्धारा वर्ष 1915 में स्थापित रतन सेन इण्टर कालेज के प्रबन्धक पद की जिम्मेदारी भी उन्होने वर्ष 1981 से लेकर 1992 तक 12 वर्षों तक बखूबी निभाई। इस दौरान विद्यालय में पठन पाठन का माहौल काफी अच्छा रहा,विद्यालय के कर्मचारी, शिक्षक,छात्र सभी को काफी राहत मिली। इस विद्यालय में वर्ष 1986 में प्रधानाचार्य पद के विवाद के चलते पठन पाठन बुरी तरह से प्रभावित होता देख राजा रूद्र प्रताप सिंह स्वयं बांसी विद्यालय पर आये तथा प्रधानाचार्य पद के विवाद को सुलझाकर बिगडे पठन पाठन के माहौल को बेहतर बनाने में सफल हुए।
राजा रूद्र प्रताप सिंह के बाबा राजा लाल रतन सेन सिंह ने अगर रतन सेन इण्टर कालेज की स्थापना की,तो उनके पिता ने राजा रतन सेन डिग्री कालेज की स्थापना वर्ष 1968 में करायी। जिसका नाम ‘‘राजा पशुपति प्रताप भवन‘‘ रखा गया। रियासत की परम्परा को आगे बढाते हुए राजा रूद्र प्रताप सिंह ने अपने पुत्र राजकुमार जय प्रताप सिंह को डिग्री कालेज को पोस्ट ग्रेजुएट कराने का सुझाव दिया। जिस पर लगभग एक दशक पूर्व रतन सेन डिग्री कालेज में पीजी की कक्षाएं प्रारम्भ हो गयी। उनकी स्मृति में ही पोस्ट ग्रेजुएट वाले भवन के हिस्से का नाम ‘‘राजा रूद्र प्रताप भवन‘‘ रखा गया,साथ ही सभागार का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया।
वर्ष 1988-89 में बांसी राजघराने के राजकुमार जय प्रताप सिंह जब अचानक राजनीति में उतरे तो कुछ विरोधियों ने राजा रूद्र प्रताप सिंह से इसका विरोध दर्ज कराया। तथा राजकुमार जय प्रताप सिंह को चुनाव लडने से रोकने की सिफाारिश की। जब बांसी की जनता ने जय प्रताप सिंह को चुनाव लडाने की पुरजोर वकालत की, तो राजा रूद्र प्रताप सिंह स्वयं बांसी आये और न केवल जय प्रताप सिंह को चुनाव लडने की अनुमति दी,बल्कि उन्हे प्रचार कार्य के लिए एक गाडी देकर अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया। एक पिता होने के नाते समय समय पर उन्होने हमेशा जय प्रताप सिंह का मार्ग दर्शन किया तथा बांसी क्षेत्र की जनता की समस्याओं को दूर कराने के लिए संघर्ष करने रहने की हिम्मत प्रदान की। लगभग 15 वर्ष पूर्व हुए कंधार विमान अपहरण कांड के साक्षात गवाह राजा रूद्र प्रताप सिंह थे। विमान अपहरण में जो यात्री फंसे थे उसमें से एक यह भी थे। बाद में अपहर्ताओं ने बूढे लोगों को छोड देने का फैसला किया तो उसी में इन्हे भी विमान से बाहर फेंका गया था। जहां बाद में मिलिट्री कैंप में जाकर इन लोगों ने शरण ली थी। और बाद में इन लोगों को सेना के लोगों ने उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाया था। कुल मिलाकर बांसी नरेश राजा रूद्र प्रताप सिंह ने अपने जीते जी अपने राजधर्म का बखूबी पालन किया। जिसके लिए वे आज बांसी के लोगों में याद किये जा रहे हैं।

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