सिद्धार्थनगर का विकास करना है तो स्वयं को आगे आना पड़ेगा

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समर्पण सेना से जुड़ कर अपने गांव जिले और भारत के विकास में सहयोग दे
हमे अपने अधिकारों को स्वयं जाने जो भारत के सविधान द्वारा हमे दी गयी है अपने क्षेत्र का विकास कर शासन प्रशासन जो आँख बंद कर सोया है वो खुद विकास नहीं करेगा विकास के लिए हमे स्वयं को आगे आना पड़ेगा इस क्रांति में जुड़ कर एक दूसरे की मदद कर हमको अपने क्षेत्र का विकास स्वयं करना होगा क्यों हम भागते है दूसरे जिले शहरों में इलाज करवाने के लिए नौकरी के लिए क्या यहाँ सब हम अपने जिले गांव में नहीं कर सकते अगर हमरे यहाँ कोई गंभीर रूप से घायल हो जाये या तो उसको लेकर हमे दूर शहरो में भागना पड़ता है हमरे यहाँ बिजली नहीं आती तो हम इन्तेज़र करना पड़ता है की बिजली कब आएगी हम स्वयं पता करने की कोशिश नहीं करते की बिजली क्यों नहीं आती अगर हमारे क्षेत्र में ट्राँफार्मर यहाँ बिजली कनेशन में कुछ समस्या आती है उसको ठीक करने के लिए लोगो से अवैध पैसे की उगाही की जाती है हमको पता नहीं होता है की बिजली विभाग द्वारा कर्मचारी नियुकत होते है जिनका यही काम होता है और सरकार दवरा उनको आय भी मिलती है परन्तु लोगो को जानकरी न होने की वजह से ऐसा होता आ रहा है सरकार दवरा सभी ग्राम पंचायतो को स्वस्थ केंद्र मुहैया करवाया गया है लेकिन वह स्वस्थ्य केंद्र की हालत देखने लायक नहीं होती न कोई कर्मचारी वह होता और जिनकी नियक्ति है उनका ना आना और सरकार से मुफ्त में आय प्राप्त करना| माना की गांव के सभी लोग पढ़े लिखे समझदार नहीं है लेकिन क्या गांव के प्रधान और ग्रामपंचायत से सम्बंधित सभी कर्मचारी पढ़े लिखे समझदार नहीं है चलो वो कर्मचारी है वो कुछ नहीं करते तो क्या गांव के पढ़े लिखे समझदार लोगो की ये जिम्मेदारी नहीं बनती की वो इसके लिए आगे आये लेकिन उन लोगो से कुछ मतलब नहीं होता सोचते है हम क्यों बोले लेकिन वो भूल जाते है की हम केवल क्या पढाई पैसे कामने के लिए और सुख सुविधाओं के लिए करते है पता नहीं हम क्यों पढ़ते है हमारे यहाँ लोग अपने बच्चो को प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने के लिए नहीं भेजते वो सोचते की इन विद्यालयों में पढाई ठीक से नहीं होती अध्यापक नहीं आते अगर पढाई तिस्क से नहीं हो रही अध्यापक नहीं आ रहे तो क्या हम स्वयं आगे आ कर इस को बदल नहीं सकते क्या क्या हमारे पास अधिकार नहीं हम डरते है क्या उन उचे लोगो से की वो सरकारी मुलाजिम है हम कुछ नहीं कर सकते हम सब कर सकते है बस अपने मन के अंदर फैले दर और गलतफैमी से बाहर निकले तभी तो कुछ कर पाएंगे जान पाएंगे क्यों फिल्मे देखते हो उसमे सरकरी कर्मचारीओ को जनता का नौकर कहा जाता है तो उसका पालन क्यों नहीं करते सरकार के लोग मीडिया के सामने खुद को जनता का सेवक बताते है वास्तव में वह खुद जनता से अपनी सेवा करवाते है अगर हमारे यहाँ पुलिस की बात की जाये तो वह केवल गलियों से हे बात करते है बहुत हे काम उम्मीद है उनसे लोगो की वह एक सामान्य लोगो की भाषा का उपयोग करे लेकिन वो पुलिस है बोल सकते है ऐसा कुछ लोग सोचते है अगर गांव का प्रधान कुछ विकास कार्य नहीं करवाता है तो लोग उससे केवल मौखिकः रूप से बोलते जिसमे वह जबाब देता है अभी आगे से कुछ होता है तो होगा यार क्या हम लिख कर समस्या नहीं बता सकते प्रधान नहीं सुनता तो उससे बड़े अधिकारी को वो नहीं सुनता तो आगे तक दो अगर वो भी नहीं सुनता तो हम तक पहुचाओ एकजुट होकर समस्या का हल करेंगे स्वयं सहायता करके लेकिन लिखते जाओ बहुत ताकत है इस कलम में लेकिन हम डरते है की प्रधान हमारे विरुद्ध ना हो जाये अगर आपकी समस्या लिखती में होगी तो प्रधान के पद से निस्कन हो जायेगा और फिर वह कभी प्रधान बनने के योग नहीं रहेगा कोटेदारो को भी अगर यहाँ काम नहीं करता तो उसके साथ भी आप अपने कलम की ताकत दिखाओ और इन सब अविकास लोगो को जड़ से उखाड फेको गांव का है तो क्या वो अपनी मनमानी करेगा जहा कोई क्षेत्र के विकास में दखल करता है उस समय हम सब गांव के लोगो को एक होकर उस विकास कार्य को करवाना होता| पढ़ने लिखने में असमर्थ है तो हमे बताये हम आपकी समस्या को उजागर करेंगे | शुरुआत आप से ख़त्म हम करेंगे |

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