आग से झुलसकर शिक्षामित्र की मौत

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सिद्धार्थनगर: शिक्षा विभाग में काफी हनक रखने वाली पूरब गनवरिया प्राथमिक स्कूल में तैनात शिक्षा मित्र ममता उर्फ सोनी का आग में झुलसने से सोमवार की सुबह मौत हो गई। ममता को जलाकर मारा गया है या वह खुद जल मरी। इसका राज उसके मोबाइल में कैद है। एक माह पहले ममता के पति विजय की भी मौत जहरीला पदार्थ खाने से हो चुकी है। पुलिस मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हुई है। हालांकि पुलिस को अभी तहरीर नहीं मिली है।

इटवा थानाक्षेत्र के पूरब गनवरिया निवासी चंद्रशेखर द्विवेदी की बहू ममता उर्फ सोनी की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन दबे जुबान लोग एक हाईप्रोफाइल व्यक्ति का दखल मान रहे हैं। बताया जा रहा है घटना से कुछ देर पहले एक बाहरी व्यक्ति गांव आया था और कुछ देर तक एक दूसरे व्यक्ति की ममता से बात हुई थी। बात किससे हुई थी? यह मोबाइल में कैद है। वैसे परिजनों के अनुसार घटना के समय घर में महिला के बड़े बेटे विशाल के अलावा कोई नहीं था। छोटा बेटा गांव में बाबा दादी के पास गया था। विशाल के शोरगुल मचाने पर गांव के लोग मौके पर पहुंचे तो ममता बुरी तरह झुलस चुकी थी। इटवा सीएचसी से उसे लखनऊ मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। तब तक पुलिस भी अनजान बनी रही। सोमवार सुबह ममता ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। इस मामले में सीओ इटवा यश त्रिपाठी ने कहा कि पहले पति की मौत और उसके बाद पत्नी की मौत निश्चित तौर पर दुखद है। इस घटना के तह तक जाने का पुलिस प्रयास करेगी। उसके मोबाइल से संबंधों को भी खंगाला जाएगा।\

इनसेट

बच्चों के सिर से उठ गया मां-बाप का साया

विशाल और कुनाल दो बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया। आखिर इन बच्चों का क्या कसूर था? कि परिवार इस तरह से बिखर गया? पूरब गनवरिया निवासी चंद्रशेखर के बड़े बेटे विजय की शादी वर्ष 2003 में उसका बाजार थानाक्षेत्र के कोल्हुआ निवासिनी ममता उर्फ सोनी से हुआ। वर्ष 2006-07 में ममता शिक्षामित्र बनी तो घर के खर्चे बढ़ गए। पति विजय पेट्रोलपंप पर सेल्समैन थे। दोनों की कमाई से घर चल रहा था। दो बच्चे भी हुए और वर्ष 2015 में सोनी का समायोजन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ। घर में पैसे बढ़े तो अरमानों के पर निकल आए। सबसे पहले तो गांव का पुराना घर छोड़ बागीचे में अलीशान भवन खड़ा हुआ। बाद में दोनों बच्चों सहित विजय और सोनी ने यहां पहुंचकर गृहस्थी बसाई। दो वर्ष तक परिवार में खुशियां रहीं और बच्चे अच्छे स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने लगे। वर्ष 2017 में समायोजन निरस्त हुआ तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। खर्चे पहले ही बढ़े थे जिसके चलते विजय को ओवरटाइम भी करना पड़ता। इधर ममता भी लेटलतीफ घर पहुंचने लगी। मामला आगे और बिगड़ा। इसी दौरान जहरीला पदार्थ खाने से विजय की मौत हो गई। महीने भर बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि ममता भी इस दुनिया से चल बसी? यह राज हर कोई जानना चाहता है। गांव वाले भी मानते हैं कि विभागीय संगठन के काम से ममता अक्सर लखनऊ जाती आती रही है।

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